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एनडीटीएल ने आईडीटीएम, स्वीडन के साथ संविदा पर हस्तामक्षर किए |
20/12/2013 |
बुधवार 02 सितम्बर, 2009
नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनडीटीएल) ने इंटरनेशनल डोपिंग टेस्ट एण्ड मैनेजमेंट (आईडीटीएम) स्टोक होम, स्वीडन के साथ एक संविदा पर हस्ताक्षर किए हैं जो डोपिंग नियंत्रण प्रबंधन का एक आधुनिकतम सेवा प्रदाता है। आईडीटीएम एक स्वतंत्र निकाय है जो नशीली दवा मुक्त खेल तथा निष्पक्ष प्रतियोगिता का वचन देने के लिए एक स्वतंत्र वैश्विक डोपिंग नियंत्रण सेवा सहित खेल संगठनों को अपनी सेवाएं प्रदान करता है। आईटीडीएम के साथ एक वर्ष में 300 नमूनों की जांच के लिए संविदा पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ढाका में आयोजित होने वाले 11वें दक्षिण एशियाई खेल-2010 के आयोजकों ने भी खेलों के दौरान 29 जनवरी से 9 फरवरी 2010 के बीच 300 नमूनों की जांच के लिए एनडीटीएल से संपर्क किया है। उन्हें प्रशुल्क के विवरण भेज दिए गए हैं। इरान एनएडीओ महा सचिव ने नमूनों की जांच के लिए एनडीटीएल के साथ एक संविदा पर हस्ताक्षर करने के लिए परीक्षण के प्रशुल्क बताने का अनुरोध भी किया है। इनके अलावा एनडीटीएल को नमूनों की जांच के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी अनुरोध प्राप्त होते हैं, जैसे नेपाल, कुवेत, दोहा, बंगला देश और श्रीलंका। इस प्रयोगशाला द्वारा वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (डब्ल्यूएडीए) प्रत्यायन प्राप्त करने के बाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए 242 नमूनों की अंतरराष्ट्रीय जांच की गई है। भारत में आयोजित होने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए प्रतियोगिता के नमूनों को प्राप्त करने के अलावा इस प्रयोगशाला में प्रतियोगिता जांच के अलावा मस्कट और पाकिस्तान से भी नमूने प्राप्त किए जाते हैं। भारत सरकार एनडीटीएल को पूरी सहायता देने के लिए वचनबद्ध है और इस प्रकार यह इस क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के अल्पावधि, मध्यावधि तथा दीर्घ अवधि लक्ष्यों को पाने पर केन्द्रित है। अल्पावधि लक्ष्य के अनुसार इसकी नमूना जांच क्षमता को वरिष्ठ में मौजूदा 2000 नमूनों से बढ़ाकर 2009 में 3000 नमूनों तक तथा 2010 में 5000 नमूनों तक बढ़ाने का है। इसका लक्ष्य मानव वृद्धि हार्मोन, रक्त प्राचल और एरिथ्रोपॉएटिन के लिए जून 2010 से पहले दो नई जांच विधियों की स्थापना करना भी है। इसका मध्यावधि लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय नमूनों के लिए प्रतियोगी दरों पर गुणवत्ता परीक्षण सेवाएं प्रदान करना भी है। यह इन अल्पावधि और मध्यावधि लक्ष्यों पर पूरा ध्यान केन्द्रित करने के साथ और राष्ट्र मंडल खेल 2010 के लिए परीक्षण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से अनुसंधान के क्षेत्रों में विविधीकरण के दीर्घ अवधि लक्ष्यों की ओर जाएगा। दिल्ली में एनडीटीएल, जिसे सितम्बर 2008 में डब्ल्यूएडी द्वारा प्रत्यायन दिया गया है, इस वर्ष मई से अपने नए परिसर में स्थानांतरित हो गया है। एनडीटीएल का नया भवन सभी आधुनिक सुविधाओं तथा नवीनतम आधुनिक उपकरणों से सज्जित है। यह जून में राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन मंडल (एनएबीएल) द्वारा सत्यापन लेखा परीक्षण के बाद से प्रचालनरत है। |
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एफआईटी-यूके-के-दो-सदस्यम-दलों-का-आगमन |
20/12/2013 |
एफआईटी, यूके के दो सदस्यम दलों का आगमन दिनांक : 17/09/09 नेशनल प्लेयिंग फील्ड्स एसोसिएशन (एनपीएफए), यूके के 2 सदस्यीय दल को फील्ड्स इन ट्रस्ट (एफआईटी) यूके के नाम से भी जाना जाता है, इसे युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. एम एस गिल ने आज आमंत्रित किया। एनपीएफए के निदेशक , सुश्री एलिसन मूर, ग्यूइन और फील्ड्स प्रबंधक श्री जॉन जेम्स शेरक के दल ने नेशनल प्ले फील्ड्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया तथा फील्ड्स इन ट्रस्ट, यूके के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के संदर्भ में भारत का दौरा किया। सुश्री एलिसन ने उन्हें महारानी द्वारा राष्ट्र मंडल खेलों की बेटन सौंपने के अवसर पर युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री को इस माह यूके आने का आमंत्रण दिया। डॉ. गिल ने आमंत्रण स्वीकार किया। द ड्यूक ऑफ एडिन बर्ग एनपीएफए, यूके के अध्यक्ष हैं। नेशनल प्लेयिंग फील्ड्स एसोसिएशन ऑफ यूके का नेतृत्व फील्ड्स इन ट्रस्ट ड्यूक ऑफ एडिन बर्ग करते हैं। इस ट्रस्ट की स्थापना 1925 में ब्रिटेन में खेल के मैदानों के संरक्षण तथा प्रोत्साहन देने के मुख्य उद्देश्य से की गई थी। स्थापना के समय से यह ट्रस्ट पूरे ब्रिटेन में खेल के मैदानों का विकास करने में सक्षम रहा है। एनपीएफए यूके की महान सफलता से प्रेरित होकर युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. एम एस गिल ने पी टी उषा, बिशन सिंह बेदी, इंदु पुरी और फली नरिमन जैसे जाने माने खिलाडियों को संस्थापना सदस्य के रूप में लेकर इस वर्ष फरवरी माह में नेशनल प्लेयिंग फील्ड्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्थापना एक संस्था के रूप में की। इस संघ का मुख्य उद्देश्य देश में खेल के मैदानों की सुरक्षा, संरक्षण और प्रोत्साहन देना है। आपसी लाभ के लिए अनुभवों के आदान प्रदान तथा विशेषज्ञता और भागीदारी के लक्ष्य सहित एनपीएफए, यूके एवं एनपीएफआई ने पिछले माह एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसी दिशा में अगले कदम के तौर पर 2 सदस्यीय दल ने भारत आकर विभिन्न उपलब्ध खुले स्थानों का अध्ययन किया जिन्हें अब तक उपयोग नहीं किया जा रहा है या केवल आंशिक रूप से उपयोग किया जा रहा है। अपने चार दिवसीय दौरे में यह दल पूरे शहर के विभिन्न खेल मैदानों में जाएगा और उनमें से कुछ मैदानों को संभाव्यतापूर्ण आदर्श खेल के मैदानों में विकसित करने की प्रायोगिक परियोजनाएं ली जाएंगी। यह दल स्थानीय निकायों जैसे डीडीए, एमसीडी और एनडीएमसी से मिलकर परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा। जनवरी 2010 में राज्य सरकारों को सुग्राही बनाने के लिए एफआईटी यूके के सहयोग से राज्य स्तर पर समान प्रकार की संस्थाओं को स्थापित करने एवं समान परियोजनाएं लेने के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी प्रस्ताव है। यह संकल्पना राज्य सरकार द्वारा इस माह आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान खेल राज्य मंत्री द्वारा बताई गई थी। राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहवर्धक रही है। |
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भारतीय-फुटबॉल-के-सदस्यों-की-विधवाओं-को-वित्तीय-सहायता |
20/12/2013 |
भारतीय फुटबॉल के सदस्यों की विधवाओं को वित्तीय सहायता
मंगलवार 01 सितम्बर, 2009 युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री ने मेल बोर्न ओलम्पिक, 1956 में भाग लेने वाली भारतीय फुटबॉल टीम और सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली टीम के सदस्यों की विधवाओं को वित्तीय सहायता अनुमोदित की है। फुटबॉल टीम के 9 सदस्यों में से, जो अब जीवित नहीं हैं, मंत्रालय केवल चार्ट सदस्यों की विधवाओं का पता लगा सका, जो हैं श्रीमती सोफिया रहमान, स्वर्गीय श्री टी ए रहमान की पत्नी, श्रीमती अल्फोंसिया थांगराज, पत्नी स्वर्गीय श्री पी आर थांगराज, श्रीमती बेबी किट्टु, पत्नी स्वर्गीय श्री के एस किट्टु और श्रीमती नानजम्मा, पत्नी स्वर्गीय श्री एम के केमपिह। इन सभी को राष्ट्रीय खेलकर्मी कल्याण कोष से 1.50 लाख रुपए प्रत्येक की वित्तीय सहायता मिलेगी। यह कोश पिछले समय के खेल कर्मियों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता देता है जिन्होंने खेल के मैदान में देश का गौरव बढ़ाया किन्तु अब अभाव की परिस्थितियों में रह रहे हैं। टीम के नौ जीवित सदस्य हैं श्री समर बनर्जी, श्री एस एस नारायण, श्री ए एस सलाम, श्री ए हुसैन, श्री एन के नंदी, श्री पी के बनर्जी, श्री एम जेड जुलफिकार, श्री तुलसीदास बलराम और श्री केशटो पाल को फरवरी 2009 में 1.50 लाख रुपए प्रत्येक की सहायता दी जा चुकी है। |
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National Sports Talent Search Scheme (NSTSS) |
03/03/2015 |
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Engagement of a Research Officer for National Sports Development Fund (NSDF) |
06/06/2015 |
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Inviting proposals from State Govts. State Level NGOs under the Scheme of National Programme for Youth and Adolescent Development |
17/06/2015 |
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Inviting proposals from State Govts. State Level NGOs under the Scheme of National Programme for Youth and Adolescent Development |
12/06/2015 |
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Grant of provisional recognition to All India Sports Council of the Deaf (AISCD) |
20/05/2015 |
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